दहेज से तौबा: सादगी से निकाह की यह पहल गरीब बेटियों की राह करेगी आसान

ViralNews #TrendingNews #MadhyaPradeshNews #HindiNews #BreakingNews #SocialMessage #DowryFreeWedding #NoDowry #ViralReels #RatlamCity

दहेज से तौबा: सादगी से निकाह की यह पहल गरीब बेटियों की राह करेगी आसान
  • दहेज को ठुकराकर पेश की मिसाल: तनवीर अहमद ने बिना दहेज कराई दोनों बेटों की शादी, सलामी में मिली बुलेट भी लौटाई
  • रतलाम में सादगी के साथ संपन्न हुए निकाह ने दिया सामाजिक संदेश, दहेज के अभाव में बेटियों की शादी नहीं कर पाने वाले परिवारों का दर्द समझकर उठाया कदम

रतलाम/ D I T NEWS :- समाज में आज भी दहेज प्रथा कई परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। आर्थिक तंगी के कारण कई माता-पिता अपनी बेटियों की शादी को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसे दौर में रतलाम के वेद व्यास कॉलोनी निवासी तनवीर अहमद ने अपने दोनों बेटों का निकाह बिना दहेज कराकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। इतना ही नहीं, निकाह के दौरान सलामी में भेंट की गई बुलेट मोटरसाइकिल को भी उन्होंने विनम्रता के साथ लेने से इनकार कर दिया।

कंस्ट्रक्शन व्यवसाय से जुड़े तनवीर अहमद ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले गुना प्रवास के दौरान उन्होंने ऐसे परिवारों की परेशानी को करीब से महसूस किया, जो रुपयों की कमी के कारण अपनी बेटियों की शादी नहीं कर पा रहे थे। इसी अनुभव ने उन्हें दहेज प्रथा के खिलाफ कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने संकल्प लिया कि अपने बेटों की शादी में दहेज के नाम पर किसी भी प्रकार का सामान या उपहार नहीं लेंगे।

तनवीर अहमद ने अपने बड़े बेटे सोहेल कुरैशी (23) का निकाह बुशरा (21) के साथ तथा छोटे बेटे अब्दुल कादिर कुरैशी (21) का निकाह आयशा (19) के साथ सादगीपूर्वक संपन्न कराया। परिवार ने दोनों निकाहों में दहेज लेने से पूरी तरह परहेज किया।

बहुओं के स्वागत के लिए खुद की व्यवस्था

तनवीर अहमद ने बताया कि निकाह के बाद बहुओं के स्वागत और गृहस्थी की शुरुआत के लिए उन्होंने अपनी ओर से जरूरी सामान की व्यवस्था की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सामान किसी लड़की पक्ष से नहीं लिया गया, बल्कि अपने परिवार की जिम्मेदारी समझते हुए स्वयं खरीदा गया।

सलामी में मिली बुलेट भी लेने से किया इनकार

निकाह के दौरान परंपरा के अनुसार सलामी देने के अवसर पर दुल्हन पक्ष की ओर से बुलेट मोटरसाइकिल भेंट करने की बात सामने आई। हालांकि, तनवीर अहमद ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे बहुओं को नहीं, बल्कि बेटियों को अपने घर ला रहे हैं। उनका मानना है कि शादी रिश्तों और परिवारों को जोड़ने का अवसर है, न कि किसी से सामान या धन लेने का।

बोले—बेटियों के पिता का दर्द समझना जरूरी

तनवीर अहमद ने कहा कि वे चाहते हैं कि समाज में ऐसी सोच विकसित हो, जिसमें किसी बेटी के पिता को आर्थिक मजबूरी के कारण अपमान या परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि उनके पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के साधन हैं, लेकिन समाज में कई परिवार ऐसे भी हैं, जो धन की कमी के कारण बेटियों की शादी नहीं कर पाते। ऐसे परिवारों की परेशानी को समझते हुए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

समाज के लिए एक संदेश..

तनवीर अहमद के इस कदम ने दहेज प्रथा और शादी में होने वाले अनावश्यक खर्च को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उनकी पहल बताती है कि यदि परिवार स्वयं आगे आकर दहेज लेने से इनकार करें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। जरूरत इस बात की है कि शादी को दिखावे और लेन-देन के बजाय आपसी सम्मान, जिम्मेदारी और रिश्तों की मजबूती का माध्यम बनाया जाए।

तनवीरअहमद कुरेशी का संदेश —बेटियां बोझ नहीं, परिवार की खुशियां हैं। शादी में दहेज नहीं, सम्मान और सादगी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।