रतलाम: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भील समाज ने दिखाई एकजुटता, दंतोड़ा में हुआ मातृशक्ति का भव्य सम्मान
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यह आयोजन आदिवासी एकता परिषद, अखिल भारतीय भील समाज, जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस), महाराणा पुंजा भील जन कल्याण संगठन और वीर एकलव्य आदिवासी सामाजिक सेवा संस्था रतलाम के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ जननायक बिरसा मुंडा, टंट्या भील, डॉ. भीमराव अंबेडकर, वीर एकलव्य और माता शबरी के चित्रों पर पूजा-अर्चना और प्रार्थना के साथ किया गया।

इस अवसर पर नारी शक्ति का सम्मान करते हुए 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला अल्ताफ बी बेगम सहित अनीशा बी, एडवोकेट कुमारी मोनिका डामर, अलीशा, आयशा और पूर्वा डामर को गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया गया।
वक्ताओं ने इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 8 मार्च 1917 को रूस की महिलाओं द्वारा रोजी-रोटी और शांति के लिए की गई हड़ताल से हुई थी। साल 1975 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे आधिकारिक मान्यता दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में नारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा गया कि— “दुनिया की पहचान है नारी, हर घर की शान है नारी। मां, बहन, बेटी और पत्नी बनकर हर आंगन का श्रृंगार है नारी।”
इस गरिमामयी आयोजन में नाथूलाल निनामा, राकेश डामर, करामत अली, दाऊद अली और समाजसेवी सूरतलाल डामर सहित बड़ी संख्या में समाजजन और ग्रामीण मौजूद रहे।