शब-ए-बारात: रहमतों और मग़फ़िरत की वो अज़ीम रात, जब खुलते हैं तौबा के दरवाज़े
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रतलाम | D I T NEWS
इस्लामिक कैलेंडर की सबसे मुकद्दस रातों में से एक, 'शब-ए-बारात' आज पूरे मुल्क के साथ-साथ रतलाम में भी बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ मनाई जा रही है। यह वह रात है जिसे 'फैसले की रात' और 'गुनाहों से तौबा की रात' कहा जाता है। आज की रात रतलाम का जर्रा-जर्रा अल्लाह की इबादत और रोशनी से सराबोर है।

इबादत और मगफिरत
शब-ए-बारात के मौके पर अकीदतमंद अल्लाह की बारगाह में सजदा-रेज़ होकर अपने गुनाहों की तौबा कर रहे हैं। इस रात का खास महत्व यह है कि लोग न सिर्फ अपने लिए दुआएं मांगते हैं, बल्कि दुनिया से रुखसत हो चुके अपने बुजुर्गों और अपनों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर उनकी मगफिरत (मोक्ष) की दुआ भी करते हैं। आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए लोग एक-दूसरे से अपनी गलतियों की माफी मांगते हैं और नेक राह पर चलने का वादा करते हैं।

रोशनी से नहाया रतलाम: मदीना मस्जिद का दिलकश नजारा
रतलाम शहर में आज रूहानी रौनक देखते ही बन रही है। शहर की तमाम छोटी-बड़ी मस्जिदें बिजली की रंग - बिरंगी रोशनी से जगमगा उठी हैं।
रतलाम की प्रसिद्ध मदीना मस्जिद आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मस्जिद को बेहद खूबसूरती से सजाया गया है, जिसकी चमक दूर-दूर तक दिखाई दे रही है।
ईशा की नमाज के बाद से ही मस्जिदों में इबादत करने वालों का तांता लगा हुआ है। कोई कुरान-ए-पाक की तिलावत कर रहा है, तो कोई नफिल नमाज अदा कर अल्लाह को राजी करने में जुटा है।
"यह रात रब की रहमतों के दरवाजे खुलने की रात है। रतलाम के चप्पे-चप्पे पर अमन-ओ-अमान और भाईचारे की दुआएं मांगी जा रही हैं।"

अकीदत का सैलाब और दुआओं का दौर
शब-ए-बारात की इस रात को 'फैसले की रात' माना जाता है। मान्यता है कि आज की रात अल्लाह रब्बुल इज्जत अगले एक साल के लिए तमाम इंसानों के रिस्क, हयात और खुशियों का फैसला फरमाता है।
मगफिरत की दुआएं : ईशा की नमाज के बाद से ही मस्जिदों में तिलावत-ए-कुरान का सिलसिला शुरू हो गया। लोग रो-रोकर अपने और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के हक में दुआएं मांग रहे हैं।
शहर के सभी क़ब्रिस्तानों लोग अपने बुजुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़ने पहुंच रहे हैं, यह मंजर याद दिलाता है कि दुनिया फानी है और आखिरत ही असल है।
इस रात का एक खूबसूरत पहलू यह भी है कि रतलाम के मुस्लिम समाज में आज लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगा रहे हैं और माफी मांग रहे हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक सौहार्द
रतलाम की गंगा-जमुनी तहजीब को बरकरार रखते हुए, पुलिस प्रशासन ने भी चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किया है ताकि इबादत करने वालों को कोई परेशानी न हो। मस्जिदों की कमेटियों ने भी आने वाले जायरीन के लिए वज़ू और बैठने के माकूल इंतजाम किए हैं।

एक संदेश : "आज की रात सिर्फ जगमगाहट की नहीं, बल्कि अपने किरदार को रोशन करने की रात है। रतलाम की इन इबादतगाहों से उठी दुआएं यकीनन मुल्क में अमन, चैन और भाईचारा लेकर आएंगी।"